चार साल से अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था पर सवाल! लालगंज की 53 ग्राम पंचायतों में निगरानी और जवाबदेही को लेकर उठी जांच की मांग
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- Updated: 11 September, 2026 09:07
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सचिव अजय शंकर के एडीओ पंचायत का अतिरिक्त दायित्व संभालने की जानकारी पर सवाल; विकास कार्यों और लाभार्थी योजनाओं से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग, विभागीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट करने की उठी आवाज
मिर्जापुर/लालगंज। लालगंज ब्लॉक की 53 ग्राम पंचायतों में पंचायत व्यवस्था, विकास कार्यों की निगरानी और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था तथा विभिन्न योजनाओं से संबंधित शिकायतों को लेकर अब लोगों की मांग है कि संबंधित अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।
स्थानीय स्तर से प्राप्त जानकारी के अनुसार सचिव अजय शंकर द्वारा लंबे समय से एडीओ पंचायत का अतिरिक्त दायित्व संभाले जाने की बात सामने आई है। साथ ही उनके पास दो क्लस्टरों से संबंधित अतिरिक्त कार्यभार होने की भी जानकारी बताई जा रही है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागीय अभिलेखों से होना आवश्यक है।
मामला इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यदि किसी कर्मचारी के पास लंबे समय तक एक से अधिक महत्वपूर्ण दायित्व रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि उस व्यवस्था की विभागीय स्तर पर समय-समय पर समीक्षा हुई या नहीं और संबंधित पंचायतों की निगरानी किस प्रक्रिया के तहत की जाती रही।
चार साल की व्यवस्था पर विभाग से जवाब की अपेक्षा
स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था यदि लंबे समय से जारी रही तो इसकी प्रशासनिक आवश्यकता क्या थी और क्या समय-समय पर इसकी समीक्षा की गई?
यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि अतिरिक्त दायित्व किस आदेश अथवा प्रशासनिक व्यवस्था के तहत सौंपा गया था और इसकी अवधि क्या रही।
इस संबंध में विभागीय रिकॉर्ड सार्वजनिक होने पर स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है।
शिकायतें हैं तो जांच से स्थिति हो साफ
लालगंज की पंचायत व्यवस्था को लेकर पूर्व में भी शिकायतें और समाचार प्रकाशित होने की बात सामने आई है। ऐसे में संबंधित विभाग के समक्ष अब यह अपेक्षा है कि शिकायतों को रिकॉर्ड के आधार पर परखा जाए।
यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। वहीं यदि जांच में किसी प्रकार की प्रशासनिक या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इस तरह जांच किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और जवाबदेही निर्धारित करने के लिए आवश्यक है।
53 ग्राम पंचायतों की निगरानी भी जांच के दायरे में हो
लालगंज ब्लॉक की 53 ग्राम पंचायतों में विभिन्न विकास एवं लाभार्थीपरक योजनाएं संचालित होती हैं। ऐसे में शिकायतों की जांच होने पर केवल किसी एक पद या कर्मचारी की भूमिका देखने के बजाय संबंधित अवधि के प्रशासनिक रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि विकास कार्यों की स्वीकृति, कार्य पूर्णता, भुगतान, अभिलेखों का रखरखाव तथा मौके पर कार्य की स्थिति में कोई अंतर तो नहीं है।
यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया जा सकता है।
कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक
स्थानीय स्तर पर कुछ विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं को लेकर अनियमितता तथा कमीशन संबंधी चर्चाएं होने की बात कही जा रही है। हालांकि इन चर्चाओं और आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि इस समय उपलब्ध नहीं है।
इसलिए इन बातों को प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं बल्कि जांच की मांग के रूप में देखा जाना चाहिए।
प्रशासन यदि शिकायतों की जांच कराता है तो संबंधित कार्यों के स्वीकृति आदेश, भुगतान अभिलेख, माप पुस्तिका, कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन तथा उपलब्ध अन्य रिकॉर्ड की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
अंत्योदय कार्डों की पात्रता को लेकर भी जांच की मांग
इसी तरह अंत्योदय राशन कार्डों को लेकर भी कुछ लाभार्थियों की पात्रता पर सवाल उठाए जाने की जानकारी सामने आई है।
इन आरोपों की पुष्टि किए बिना किसी लाभार्थी अथवा अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। हालांकि यदि किसी कार्ड की पात्रता को लेकर शिकायत प्राप्त हुई है तो संबंधित कार्डधारकों के अभिलेख, पात्रता संबंधी दस्तावेज और विभागीय रिकॉर्ड की जांच कराई जा सकती है।
जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित समय पर लाभार्थी निर्धारित पात्रता में आता था या नहीं तथा कार्ड जारी करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
सरकार की योजनाओं का उद्देश्य और जमीनी क्रियान्वयन
केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों के लिए विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जाती हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य पात्र लोगों तक लाभ पहुंचाना है।
इसलिए स्थानीय स्तर पर किसी योजना के क्रियान्वयन को लेकर शिकायत सामने आने पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाने के बजाय संबंधित प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था की जांच करना अधिक महत्वपूर्ण है।
यदि किसी पात्र व्यक्ति को लाभ नहीं मिला या किसी अपात्र व्यक्ति को लाभ मिलने की शिकायत है तो रिकॉर्ड आधारित सत्यापन से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
सवाल अतिरिक्त प्रभार से आगे बढ़कर निगरानी व्यवस्था का
पूरे मामले में मुख्य प्रश्न केवल यह नहीं है कि अतिरिक्त प्रभार किसके पास था। बड़ा सवाल यह है कि उस अवधि में संबंधित कार्यों की निगरानी किस स्तर पर हुई।
क्या नियमित निरीक्षण हुए?
क्या विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन किया गया?
क्या भुगतान से पहले संबंधित अभिलेखों की जांच हुई?
क्या लाभार्थियों की पात्रता का सत्यापन किया गया?
और यदि किसी स्तर पर शिकायत प्राप्त हुई तो उसका निस्तारण किस प्रकार किया गया?
इन सभी प्रश्नों का उत्तर विभागीय रिकॉर्ड और जांच से ही स्पष्ट हो सकता है।
संबंधित अधिकारी का पक्ष भी महत्वपूर्ण
किसी भी व्यक्ति या अधिकारी के संबंध में प्रतिकूल आरोप प्रकाशित किए जाने से पहले उसका पक्ष जानना पत्रकारिता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। प्रेस काउंसिल के मानदंड भी आरोपों के संबंध में संबंधित व्यक्ति/संस्था का पक्ष लेने और जवाब प्रकाशित करने के महत्व को रेखांकित करते हैं।
इस मामले में भी संबंधित सचिव/एडीओ पंचायत तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों से उनका पक्ष लिया जाना चाहिए। यदि उनका कोई स्पष्टीकरण प्राप्त होता है तो उसे खबर में उचित स्थान दिया जाना चाहिए।
समाचार पत्र का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक महत्व के सवालों को संबंधित अधिकारियों के सामने रखना और तथ्य सामने लाना है।
अब जांच और स्पष्टीकरण की मांग
लालगंज की 53 ग्राम पंचायतों से जुड़े इस मामले में स्थानीय लोगों की मांग है कि यदि शिकायतें प्राप्त हुई हैं तो संबंधित अवधि के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
साथ ही अतिरिक्त प्रभार से संबंधित आदेश, अवधि, कार्यभार और समीक्षा व्यवस्था को भी स्पष्ट किया जाए।
यदि जांच में कोई अनियमितता नहीं मिलती है तो संबंधित पक्ष को इससे राहत मिलेगी और यदि कोई कमी या अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार सुधारात्मक अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।
जनता के सवाल, प्रशासन के जवाब का इंतजार
लालगंज में अब चर्चा का केंद्र यही है कि लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था किस आधार पर चली, पंचायतों की निगरानी किस प्रकार हुई और शिकायतों के संबंध में विभाग ने क्या कदम उठाए।
जनता के सवालों का जवाब आरोपों से नहीं बल्कि रिकॉर्ड, जांच और पारदर्शी कार्रवाई से मिल सकता है।
अब निगाह जिला पंचायत राज विभाग और ब्लॉक प्रशासन पर है कि वह इन शिकायतों और सवालों को किस रूप में लेता है और क्या संबंधित अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जाती है।
सबसे अहम सवाल
क्या चार साल से चली आ रही अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था की विभागीय समीक्षा हुई?
क्या संबंधित अवधि के विकास कार्यों और भुगतान अभिलेखों का सत्यापन कराया जाएगा?
क्या अंत्योदय कार्डों से जुड़ी पात्रता संबंधी शिकायतों की जांच होगी?
और यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी?
इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभागीय अधिकारियों की जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही सामने आएगा।
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