सुप्रीम कोर्ट ने ‘यूपी मदरसा बोर्ड एक्ट को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय पर लगायी रोक।
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- Updated: 6 April, 2024 09:56
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PPN NEWS
रिपोर्ट सुरेंद्र शुक्ला
लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट ने ‘यूपी मदरसा बोर्ड एक्ट को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय पर लगायी रोक।
सुप्रीम कोर्ट ने ‘यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004’ को असंवैधानिक करार देने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के 22 मार्च के निर्णय पर रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के द्वारा विगत 22 मार्च 2024 के आदेश को चुनौती देने वाली अपीलों पर केन्द्र एवं राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि हाई कोर्ट के गलत फैसले से 17 लाख छात्रों पर असर पड़ेगा और छात्रों को दूसरे स्कूल में स्थानांतरित करने का निर्देश देना उचित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “मदरसा बोर्ड का उद्देश्य और कार्य विनियमन से जुड़ा है, और इलाहाबाद हाईकोर्ट यह मानने में प्रथम दृष्टया सही नहीं है कि बोर्ड की स्थापना से धर्म निरपेक्षता का उल्लंघन होगा।”
तीन सदस्यीय पीठ में मुख्य न्यायधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ के साथ जस्टिस जे .बी पारदीवाला व जस्टिस मनोज मिश्रा भी शामिल थे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा यूपी मदरसा बोर्ड एक्ट-2004 को असंवैधानिक व भंग करने के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवायी के दौरान मदरसा बोर्ड की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी, हुजैफा समेत कई वकील पेश हुए ।
इस दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हाईकोर्ट का अधिकार नहीं बनता कि इस एक्ट को रद्द कर सके। हाईकोर्ट के इस निर्णय से 17 लाख छात्र भी प्रभावित हैं। साथ ही इस आदेश से लगभग 25,000 मदरसे प्रभावित हुए हैं ।
सुपीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली इन याचिकाओं पर केन्द्र, यू.पी सरकार, यू.पी मदरसा एजुकेशन बोर्ड को नोटिस जारी किया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यू.पी और केन्द्र सरकार को 31 मई-2024 तक इस मामले को लेकर जवाब भी दाख़िल करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट में इस अहम मामले पर अब अगली सुनवायी जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक इस मामले में रोक कायम रहेगा।
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