पाइप लीकेज विवाद में दर्ज मुकदमे पर भड़के सपाई, काकोरी थाने में दिया धरना
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- Updated: 26 August, 2026 21:08
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पाइप लीकेज विवाद में दर्ज मुकदमे पर भड़के सपाई, काकोरी थाने में दिया धरना
जल जीवन मिशन पाइपलाइन विवाद में सपा नेताओं पर मुकदमे के विरोध में थाने पर प्रदर्शन।
सपा जिलाध्यक्ष ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई, ग्राम प्रधान ने लगाया बंधक बनाने का आरोप।
काकोरी लखनऊ। लखनऊ के काकोरी स्थित रसूलपुर गांव में जल जीवन मिशन की पानी की टंकी की पाइपलाइन मरम्मत को लेकर उपजे विवाद ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में सपा मलिहाबाद ब्लॉक अध्यक्ष संदीप यादव समेत कई लोगों के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट दर्ज होने से कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया। मुकदमे को पूरी तरह फर्जी बताते हुए बुधवार को सपा जिलाध्यक्ष जय सिंह जयंत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता काकोरी थाने पहुंचे और परिसर में धरने पर बैठ गए। लगभग आधे घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और एकतरफा कार्रवाई रोकने की मांग की। बाद में इंस्पेक्टर संतीश राठौर के उचित व निष्पक्ष कार्रवाई के आश्वासन पर धरना समाप्त हुआ।
सपा नेताओं का कहना है कि रसूलपुर गांव में राजेश गौतम के घर के सामने पाइपलाइन लीकेज ठीक करने के लिए गड्ढा खोदा गया था, जिसमें उनकी बेटी गिरने से बाल-बाल बची और इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। सपा मलिहाबाद ब्लॉक अध्यक्ष संदीप यादव का आरोप है कि पीड़ित पक्ष की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई, जबकि ग्राम प्रधान श्यामा की तहरीर पर उनके पक्ष के लोगों पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसी रंजिश में प्रधान पक्ष के लोगों ने मंगलवार रात वीरेंद्र यादव के साथ मारपीट की। थाने में हुए इस प्रदर्शन के दौरान सोनू कन्नौजिया, सीएल वर्मा, पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजबाला रावत, टीबी सिंह, जितेंद्र सिंह, रामगोपाल सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
दूसरी ओर ग्राम प्रधान श्यामा ने सपा नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रधान के अनुसार 22 अगस्त को जब पाइपलाइन रिसाव की मरम्मत का कार्य चल रहा था, तब पूर्व प्रधान अमर सिंह यादव अपने सहयोगियों के साथ वहां पहुंचे और श्रमिकों व सुपरवाइजर के साथ अभद्रता की। आरोप है कि अमर सिंह यादव, संदीप यादव, वीरेंद्र और उनके समर्थकों ने कर्मचारियों के मोबाइल फोन और बाइक छीनकर उन्हें बंधक बना लिया था। मौके पर तनाव बढ़ने और पुलिस की मौजूदगी में हाथापाई होने के बाद आपातकालीन पुलिस सेवा 112 को सूचना दी गई, जिसके बाद देर रात पहुंची पुलिस टीम ने बंधक बनाए गए कर्मचारियों और मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला।
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