स्मार्ट मीटर के विरोध में महिलाओं का भारी प्रदर्शन, काकोरी बिजली उपकेंद्र का घेराव
- Posted By: Admin
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- Updated: 13 April, 2026 19:03
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स्मार्ट मीटर के विरोध में महिलाओं का भारी प्रदर्शन, काकोरी बिजली उपकेंद्र का घेराव
स्मार्ट मीटर के चलते बढ़ते बिजली बिलों से नाराज महिलाओं ने काकोरी बिजली उपकेंद्र पर किया जोरदार प्रदर्शन।
नगर पंचायत अध्यक्ष ने सात दिनों में समाधान का दिया आश्वासन, समस्या दूर न होने पर बड़े आंदोलन की दी चेतावनी।
काकोरी लखनऊ। सोमवार को काकोरी क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के खिलाफ महिलाओं का जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। करीब सौ से अधिक महिलाओं ने लामबंद होकर काकोरी बिजली उपकेंद्र का घेराव किया और विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन के चलते काफी समय तक उपकेंद्र परिसर में हंगामे और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का स्पष्ट रूप से आरोप है कि जब से क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, बिजली के बिलों में अप्रत्याशित और अचानक भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इससे उनके घर का मासिक बजट पूरी तरह चरमरा गया है। महिलाओं ने बताया कि पहले जहां सामान्य बिल आता था, अब उसकी तुलना में कई गुना अधिक राशि के बिल आ रहे हैं, जिनका भुगतान करना सामान्य परिवारों के लिए अत्यंत कठिन हो गया है। उग्र महिलाओं ने मांग की है कि स्मार्ट मीटरों को तत्काल हटाकर पुराने मीटरों को दोबारा स्थापित किया जाए।
हालाँकि मौके पर मौजूद बिजली विभाग के अधिकारियों ने महिलाओं को समझाने और उनकी शिकायतों के निस्तारण का भरोसा दिलाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी महिलाएं अपनी मांगों को लेकर टस से मस नहीं हुईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों का हुजूम भी वहां जमा हो गया।
सूचना पाकर काकोरी नगर पंचायत अध्यक्ष रोहित साहू भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने आक्रोशित महिलाओं से वार्ता कर उन्हें शांत कराया। नगर पंचायत अध्यक्ष ने बिजली विभाग को दो टूक शब्दों में कहा कि स्मार्ट मीटर से जुड़ी इन गंभीर समस्याओं का समाधान सात दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा के अंदर महिलाओं की समस्याओं का हल नहीं निकला, तो वह स्वयं अधिक संख्या में महिलाओं के साथ धरने पर बैठने को विवश होंगे। वर्तमान में प्रशासन और बिजली विभाग मामले की जांच कर समाधान का दावा कर रहे हैं, जबकि स्थानीय महिलाएं अभी भी अपनी मांगों पर अडिग हैं।

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