भस्मासुर साबित हो सकते हैं भाजपा के अपने ही बागी उम्मीदवार

भस्मासुर साबित हो सकते हैं भाजपा के अपने ही बागी उम्मीदवार
अधिसूचना के पहले ही बागी उम्मीदवारों की संख्या में इजाफा, भाजपा के लिए मुसीबत
पी पी एन न्यूज
(कमलेन्द्र सिंह)
फ़तेहपुर।
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी अनारक्षित होने के बाद यहां होने वाले सदस्यों के चुनाव मैं गजब का उत्साह देखा जा रहा है। भले ही अधिसूचना जारी ना हो लेकिन चुनाव प्रचार चरम पर है। लोग अध्यक्ष पद के दावेदारों के नामों की भी चर्चा शुरू कर दी है।एक से बढ़कर एक अध्यक्ष पद के दावेदारों के नाम आने के बाद सदस्य पद का यह चुनाव और भी अधिक मारामारी व कांटे का होगा। सदस्य पद के कई सीटों पर अध्यक्ष पद के दावेदारों ने अपने-अपने उम्मीदवारो को भी उतारने की योजना बना चुके हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव आरक्षित होने के बाद भी काफी दिलचस्प और संघर्ष भरा होता था। लेकिन इस बार अनारक्षित (सामान्य) होने के बाद यह चुनाव कुछ और भी अधिक संघर्ष पूर्ण होने की स्थिति में पहुँच गया है। भारतीय जनता पार्टी जहां इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोकने का मन बना चुकी है वही मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। सपा भी यहां होने वाले सभी 46 पदों पर सदस्य पद के उम्मीदवारों को उतारेगी ऐसी रणनीति समाजवादी पार्टी करीब करीब बना चुकी है और अपने उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा भी कर चुकी है। यह कहा जा रहा है कि अधिसूचना जारी होने के बाद नामों की घोषणा कर दी जाएगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पिछले 5 सालों तक भाजपा के पास थी।भाजपा इस बार भी अध्यक्ष पद की कुर्सी किसी भी कीमत पर गवाना नहीं चाहती। शायद इन्ही बातों को लेकर वह सभी46 जिला पंचायत सदस्यों के उम्मीदवारों का चयन बहुत ही सूझबूझ के साथ करना चाह रही है। अपना अधिकृत उम्मीदवार भी बनाने पर विचार कर रही है। भाजपा की यह रणनीति जमीन पर कितनी कारगर होगी यह तो समय बताएगा।
पहले उसे अपनों से ही निपटना पड़ेगा। बनाई गई रणनीति पर उसके अपने ही भारी पड़ सकते हैं। क्योंकि कुछ सीटों पर जिस तरह से भाजपा के ही कार्यकर्ता आपस में ताल ठोक रहे हैं और अपनी अपनी दावेदारी को मजबूत बता रहे हैं उससे भाजपा जिला नेतृत्व के माथे पर पसीना आना स्वाभाविक है। यदि जानकार सूत्रों की माने तो अध्यक्ष पद के दावेदारों में कई ऐसे दावेदार हैं जो अपने अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतार रहे है। उन्हें चुनाव लड़ने के नाम पर धन भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। जिससे बागी उम्मीदवारों की संख्या में इजाफा हो सकता है,जो भाजपा के लिए सिरदर्द साबित होने की स्थिति में है।
सवाल ऐसे बागी संभावित उम्मीदवारों से होना चाहिये कि क्या उन्हें भाजपा नेतृत्व के निर्देशों का पालन नहीं करना चाहिए और क्या संभावित अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के अपना अपना उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारना नीति संगत है।
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