भक्ति के सागर में डूबी राजधानी: नए साल पर उमड़ा जनसैलाब
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- Updated: 2 January, 2026 07:15
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भक्ति के सागर में डूबी राजधानी: नए साल पर उमड़ा जनसैलाब
आस्था का भव्य संगम धार्मिक पर्यटन का नया अध्याय
लखनऊ। लखनऊ में नए साल का आगाज भक्ति और आध्यात्म के अनूठे संगम के साथ हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और पर्यटन विभाग के प्रयासों के फलस्वरूप राजधानी अब धार्मिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो चुकी है। नए साल के पहले दिन शहर के प्रमुख मंदिरों, गुरुद्वारों और जैन तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। अलीगंज स्थित नए हनुमान मंदिर में करीब 2.50 लाख भक्तों ने मत्था टेका, जिसे 501 किलो फूलों से भव्य रूप में सजाया गया था। वहीं, हनुमान सेतु मंदिर में भी 1.50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। मनकामेश्वर मंदिर की महंत दिव्या गिरी के सानिध्य में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जहां डेढ़ लाख से ज्यादा भक्तों ने बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस अभूतपूर्व भीड़ को सरकार की नीतियों की सफलता बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक केंद्र बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है, जिससे न केवल आस्था को बल मिल रहा है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी नई गति मिल रही है।
राजधानी में 'सर्वधर्म समभाव' की झलक गुरुद्वारों और जैन मंदिरों में भी देखने को मिली। यहियागंज, आलमबाग और इंदिरानगर के गुरुद्वारों में विशेष दीवान सजे, तो वहीं जैन मंदिरों में शांति धारा और अभिषेक के अनुष्ठान हुए। सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। बुद्धेश्वर महादेव मंदिर के लिए 02.31 करोड़, प्राचीन रैदास मंदिर के लिए 04.64 करोड़ और यहियागंज गुरुद्वारे के विकास हेतु 02 करोड़ रुपए की योजनाएं संचालित हैं। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री पर्यटन स्थल विकास योजना के तहत इंदिरानगर स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर को भी 01 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। सुरक्षित वातावरण, सुगम आवागमन और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण ही आज लखनऊ का धार्मिक पर्यटन मॉडल देश के लिए एक मिसाल बनकर उभरा है।

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