ताजमहल से शुरू होगा यूपी का सफर - जापान से आएगा 240 सदस्यीय दल
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ब्रज की परंपरा से काशी की गंगा आरती तक...जापानी मेहमानों के लिए यूपी ने तैयार की खास यात्रा
सारनाथ की यूनेस्को पहचान से जापान तक पहुंचेगा यूपी का बौद्ध पर्यटन, जापानी प्रतिनिधिमंडल करेगा प्रदेश का भ्रमण
काशी की आध्यात्मिकता और ब्रज की परंपराएं जापानी पर्यटकों को देंगी खास अनुभव : जयवीर सिंह
लखनऊ, 19 अगस्त 2026:
उत्तर प्रदेश और जापान के बीच सांस्कृतिक एवं पर्यटन संबंधों को नई मजबूती मिलने जा रही है। नई दिल्ली में आयोजित 'यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026' के बाद जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर कोटारो नागासाकी के नेतृत्व में 240 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 20 अगस्त को उत्तर प्रदेश के चार दिवसीय दौरे पर पहुंचेगा। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने जापानी प्रतिनिधियों के लिए ऐसा विशेष भ्रमण कार्यक्रम तैयार किया है, जिसमें ऐतिहासिक स्मारकों के साथ प्रदेश की जीवंत संस्कृति, ब्रज परंपरा, बौद्ध विरासत, आध्यात्मिकता, खान-पान और वेलनेस पर्यटन का अनुभव कराया जाएगा। आगरा, लखनऊ और वाराणसी की यात्रा के दौरान यह दल प्रदेश की विविध सांस्कृतिक पहचान से रूबरू होगा और दोनों क्षेत्रों के बीच पर्यटन एवं सांस्कृतिक सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा करेगा।
ताजमहल से शुरू होगा यूपी का सफर
जापानी प्रतिनिधिमंडल 20 अगस्त को आगरा पहुंचेगा, जहां जापानी मेहमानों का ब्रज की पारंपरिक संस्कृति और लोक परंपराओं के साथ स्वागत किया जाएगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे। इसके बाद दल ताजमहल का भ्रमण कर लखनऊ के लिए रवाना होगा। इस दौरान जापानी मेहमानों को प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत के साथ उसकी जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया जाएगा।
21 अगस्त को लखनऊ में पर्यटन सहयोग पर मंथन
लखनऊ में 21 अगस्त को पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह जापानी प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करेंगे। इस दौरान उत्तर प्रदेश की बौद्ध पर्यटन क्षमता और जापान के साथ पर्यटन सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। दोनों पक्ष बौद्ध पर्यटन के अलावा वेलनेस, मेडिटेशन, अनुभव आधारित पर्यटन, खान-पान, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करेंगे। यामानाशी और उत्तर प्रदेश के बीच पहले हुई चर्चाओं में भी पारंपरिक पर्यटन से आगे बढ़कर ऐसे अनुभव विकसित करने पर जोर दिया गया था।
UNESCO मान्यता से बढ़ी संभावनाएं
उत्तर प्रदेश में भगवान बुद्ध के जीवन और उनके उपदेशों से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थल हैं। सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु, कौशांबी और संकिसा जैसे प्रमुख बौद्ध स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं, कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है। हाल ही में सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने से प्रदेश के बौद्ध पर्यटन को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। माना जा रहा है कि इससे जापान जैसे बौद्ध देशों से पर्यटकों को आकर्षित करने और इन स्थलों को एक समग्र बौद्ध पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की संभावनाएं और मजबूत होंगी।
इस पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, उत्तर प्रदेश और जापान बुद्ध संस्कृति, सभ्यता और विरासत साझा करते हैं, लेकिन पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं इससे कहीं अधिक व्यापक हैं। उन्होंने बताया कि काशी की आध्यात्मिकता, ब्रज की परंपराएं, प्रदेश का खान-पान, वेलनेस और जीवंत संस्कृति जापानी पर्यटकों को विशेष अनुभव दे सकती हैं। यह यात्रा दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक परिचय को मजबूत करने के साथ लोगों के बीच संपर्क और पर्यटन आवागमन बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने बताया दोनों पक्ष खेल पर्यटन, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान और नए अनुभव आधारित पर्यटन प्रारूपों पर भी आगे काम कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश और जापान के बीच पर्यटन सहयोग में खान-पान और वेलनेस को भी महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। लखनऊ को यूनेस्को क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी की मान्यता मिलने के बाद यहां की संस्कृति को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं और बढ़ी हैं। यह प्रतिनिधिमंडल 22 अगस्त को लखनऊ से वाराणसी के लिए रवाना होगा। वाराणसी में जापानी मेहमान सारनाथ का भ्रमण करेंगे और गंगा के घाटों पर गंगा आरती का अनुभव लेंगे। इस तरह यात्रा में बौद्ध विरासत के साथ काशी की जीवंत आध्यात्मिक परंपरा का भी समावेश होगा।
जुलाई में लखनऊ में जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई तैयारी बैठक में भी मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि जापानी मेहमानों को केवल पारंपरिक पर्यटन स्थलों का भ्रमण न कराया जाए, बल्कि उन्हें उत्तर प्रदेश की संस्कृति, परंपराओं और आतिथ्य का वास्तविक अनुभव कराया जाए। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने बताया पर्यटन संबंध तब मजबूत होते हैं, जब पर्यटक अपने साथ किसी स्थान का अनुभव लेकर लौटते हैं। जापानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य प्रदेश की विविधता, गर्मजोशी और सांस्कृतिक गहराई को समझकर लौटें और आगे अधिक जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश से जोड़ने में सेतु की भूमिका निभाएं, यही इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य है।
23 अगस्त को होगी वाराणसी से विदाई
240 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में यामानाशी प्रीफेक्चर के सरकारी प्रतिनिधियों के साथ कारोबारी, शिक्षाविद और युवा भी शामिल हैं। 20 से 23 अगस्त तक चलने वाली यह यात्रा दोनों क्षेत्रों के बीच पर्यटन, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क को नई दिशा देने की महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। चार दिवसीय कार्यक्रम के दौरान आगरा की विरासत, लखनऊ की संस्कृति और खान-पान, प्रदेश की बौद्ध धरोहर तथा वाराणसी की आध्यात्मिक परंपरा को एक साथ प्रस्तुत किया जाएगा। 23 अगस्त को वाराणसी से प्रतिनिधिमंडल की यूपी यात्रा समाप्त होगी। यह दौरा जापान और उत्तर प्रदेश के बीच बौद्ध पर्यटन के साथ-साथ वेलनेस, संस्कृति, खान-पान और अनुभव आधारित पर्यटन के नए रास्ते खोलेगा।

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