इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, कहा- पति व पत्नी को एक ही जिला में नियुक्ति पाने का है पूरा अधिकार।

प्रकाश प्रभाव न्यूज़
रिपोर्ट :ज़मन अब्बास
दिनांक :13/10/2021
प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे सहायक अध्यापकों को बड़ी सहूलियत देते हुए कहा है कि पति-पत्नी को एक ही जिला में नियुक्ति पाने का कानूनी अधिकार है। कोर्ट ने अंतर जिला स्थानांतरण के मामले में ऐसे अध्यापकों को राहत दी है, जिनकी पत्नियां अध्यापक हैं और वह अपने ससुराल वाले जिले में नियुक्त हैं। इसके अलावा कोर्ट ने ऐसे अध्यापकों को राहत दी है जो स्वयं अथवा उनके माता-पिता किसी असाध्य रोग से पीडि़त हैं। कोर्ट ने ऐसे अध्यापकों को विशेष परिस्थिति में मानते हुए एक जनपद पर पांच साल की सेवा अनिवार्यता की छूट पाने का पूरा हकदार माना है। बेसिक शिक्षा सचिव को इनके स्थानांतरण पर विचार कर निर्णय लेने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने संजय सिंह, राजकुमार सिंह, वीरसेन, वरुण कुमार व अन्य की याचिकाओं पर दिया है। याचिका कर्ताओ का कहना था कि याचीगण की सेवा पांच साल की नहीं हुई है, लेकिन उनकी पत्नियां दूसरे जिलों में नियुक्त हैं, उनका भी उन्हीं जिलों में स्थानांतरण किया जाय, जहां उनकी पत्नियां कार्यरत हैं।
बेसिक शिक्षा परिषद के अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पांच साल सेवा की अनिवार्यता में महिलाओं को छूट है, लेकिन पुरुषों को ऐसी छूट नहीं है। इसलिए स्थानांतरण की मांग पत्नियां कर सकती हैं। पुरूष अध्यापक नहीं। महिलाओं को अपने ससुराल वाले जिले में नियुक्ति पाने का अधिकार है। इस मामले में याचीका कर्ता की पत्नियां पहले से ही अपने ससुराल वाले जिले में नियुक्त हैं। ऐसे में वो स्थानांतरण की मांग नहीं कर सकतीं। कोर्ट ने कहा कि शिक्षक पति-पत्नी को एक ही जनपद में नियुक्ति पाने का पूरा अधिकार है। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद याचीका कर्ता के प्रत्यावेदन पर चार सप्ताह में विचार करके निर्णय लें।
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