लोग झेल रहे गरीबी की मार, कोटेदार फिर भी कर रहे अत्याचार

Prakash prabhaw news
रिपोर्टर-अरविंद
लोग झेल रहे गरीबी की मार, कोटेदार फिर भी कर रहे अत्याचार
हरदोई।
जिले के कई ग्रामीण इलाकों में गरीबी की मार झेल रहे लोगों पर कोटेदार राशन न देकर लगातार अत्याचार कर रहे हैं। एक ओर जहां देश भर में लॉक डाउन की वजह से गरीबों को 02 जून की रोटी के लाले पड़े हुए हैं। ऐसे में मजबूरी का फायदा उठाकर कोटेदार उन्हें यह कहकर वापस भेज देता है कि उसका नाम अब राशन कार्ड की लिस्ट से कट गया है। जबकि प्रदेश सरकार का यह आदेश है कि जिन गरीबों के पास राशन कार्ड न हो या उनका नाम राशन कार्ड लिस्ट में न हो तो उन्हें प्रति आधार कार्ड 05 किलो. के हिसाब से राशन दिया जाए। चाहे वह ग्रामीण क्षेत्र का हो या फिर शहरी क्षेत्र का किंतु जिले के कई ग्रामीण इलाकों में कोटेदार गरीबों को राशन न देकर उन्हें भुखमरी की कगार पर खड़ा कर देने को आतुर हैं। अब भूखे पेट आखिर गरीब न तो जी सकता है और न ही मर सकता है। लॉक डाउन के बीच गरीबों पर कोटेदारों द्वारा किया जा रहा यह अत्याचार आखिर कहां तक जायज है।
संडीला तहसील के कछौना ब्लॉक की ग्रामसभा महरी ग्रामसभा, हरपालपुर ब्लॉक के ग्राम चांदा महमदपुर व बावन ब्लॉक के ग्राम रारा आदि से शिकायतें मिलीं कि कहीं पर राशन देने से कोटेदार साफ मना करते हैं तो कहीं राशन कम दे रहे हैं। बावन ब्लॉक के ग्राम रारा में कोटेदार दिनेश द्वारा अंत्योदय कार्ड धारक बुजुर्ग भगवान दीन पुत्र गोपाल को राशन देने से साफ इंकार किया जा रहा है। भगवान दीन के मुताबिक, पिछले कई माह से कोटेदार उन्हें राशन नहीं दे रहा है। ठीक से चल भी न पाने वाले इस बुजुर्ग को दुत्कार कर भगा देने में इस कोटेदार को जरा भी लाज नहीं आती है। लॉक डाउन के बीच जब कोटेदार गरीबों को राशन ही नहीं देंगे तो आखिर ये लोग क्या खाएंगे और बिना खाये कैसे जीवन जिएंगे। जिले में डीएम द्वारा किये जा रहे सभी मानवतापूर्ण कार्यों को कोटेदारों की यह कार्यशैली निश्चित रूप से धूमिल करने का काम कर रही है।
अपने चहेतों पर ही कृपा बरसा रहे हैं कोटेदार...
जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में नोडल अधिकारी और कोटेदार की सांठगांठ के चलते गरीबों को राशन नहीं दिया जा रहा है। कोटेदार सिर्फ अपने चहेतों को ही राशन देता है। जिससे उसकी निजी दुश्मनी है, उसे वह राशन नहीं देता है। बल्कि उसे दुत्कार कर भगा देता है। कई जगहों के कोटेदार तो गरीबों को धमकी तक दे डालते हैं। यह धमकी कोटेदार सिर्फ अपने दमखम से तो नहीं दे सकता है। इसके पीछे जरूर किसी जिलास्तरीय अधिकारी का हाथ है। कई स्थानों से ऐसी शिकायतें भी आयी हैं।
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