मासूम संध्या के चेहरे पर लौटी खुशियां तो समाजसेवी अखिलेश को मिली दुआएं

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मासूम संध्या के चेहरे पर लौटी खुशियां तो समाजसेवी अखिलेश को मिली दुआएं
मोहनलालगंज, लखनऊ।
रिपोर्ट- सरोज यादव।
कहते हैं अगर मन में सेवा भाव हो तो कोई कार्य नामुमकिन नहीं है कुछ ऐसा ही समर्पण और सेवाभाव मोहनलालगंज के एक समाजसेवी अखिलेश द्विवेदी में दिखता है जो किसी भी जरूरत मंद की मदद करने को हमेशा तत्पर रहते हैं चाहे वो कोरोना काल की भीषण त्रासदी रही हो या किसी गरीब निर्धन परिवार को आर्थिक सहायता और बीमार को उपचार कराने की बात हो अखिलेश द्विवेदी के संज्ञान में आते ही वो पूरे मनोयोग से जरूरत मंद की मदद में जुट जाते हैं ऐसा ही एक और ताजा मामला सामने आया जिसमें एक माह पूर्व निर्धन परिवार की नौ वर्ष की मासूम बच्ची स्कूल में पढ़ाई के दौरान विद्यालय में लगे पेड़ की डाल गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गई।
उसके सिर में गहरा घाव हो गया। उसे उपचार हेतु लखनऊ के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया जहां पैसों के अभाव में धरती के भगवान कहे जाने वाले जिम्मेदार चिकित्सकों ने चार दिन बाद ही उस मासूम की स्थिति को सामान्य बताकर उसे घर भेज दिया।
लेकिन घर लाने के उपरांत मासूम बच्ची की हालत सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ने लगी तो परिवारीजन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते परेशान होने लगे। किसी तरह एक सप्ताह का समय गुजरा लेकिन मासूम बच्ची की हालत लगातार गंभीर होती चली गई तो परिवारीजनों ने एक निजी अस्पताल में बच्ची को भर्ती कराया लेकिन पैसों के अभाव में वहां भी सही उपचार न मिलने से मासूम बच्ची जब अपनी याद्दाश्त और होशोहवास खोने लगी तो परिवारीजनों की उम्मीद जवाब देने लगी।
लेकिन तभी किसी परिचित से जानकारी पाकर समाजसेवी अखिलेश द्विवेदी ने उस मासूम बच्ची के परिजनों से मिलकर उनका ढांढस बंधाया और अपने सहयोगियों और परिचितों के साथ ही शासन प्रशासन से भी मासूम के उपचार के लिए मदद की गुहार लगाई उनकी मुहिम काम आई और मोहनलालगंज के उपजिलाधिकारी हनुमान प्रसाद मौर्या ने भी मामले का संज्ञान लिया और अस्पताल जाकर बच्ची का हाल चाल लेने के साथ ही लेखपाल को भेजकर आर्थिक सहायता दिलाने के लिए शासन को पत्र भेजा। इसी बीच समाजसेवी अखिलेश द्विवेदी की अपील पर एक निजी अस्पताल के संचालक ने दरियादिली दिखाते हुए मासूम के निःशुल्क उपचार की संम्पूर्ण जिम्मेदारी ले ली।
इस बीच लगातार अखिलेश द्विवेदी अपनी मुहिम में जुटे रहे और उसका नतीजा ये हुआ कि 15 दिनों तक आईसीयू में रहते हुए उपचार के बाद मासूम संध्या जब शनिवार को आईसीयू से स्वयं अपने पैरों पर चलकर चेहरे पर विजयी मुस्कान के साथ बाहर निकली तो परिजनों और अस्पताल कर्मियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
जिसका सारा श्रेय परिजनों और अस्पताल संचालकों ने समाज सेवी अखिलेश द्विवेदी को देते हुए कहा कि अगर आज मेरी बच्ची के चेहरे पर खुशियां आईं हैं तो उसका सबसे ज्यादा श्रेय अगर किसी को जाता है तो वो अखिलेश द्विवेदी को जाता है जिन्होंने अपने परिवार के सदस्य की तरह हमारी बच्ची का बेहतर उपचार कराया और अपने सहयोगियों के जरिए आर्थिक मदद भी दिलाई और अब सरकारी सहायता दिलाने के लिए भी प्रयासरत हैं। वहीं मासूम बच्ची के चेहरे पर खुशी देखकर सभी शुभचिंतकों में भी खुशी की लहर देखने को मिली।
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