यूपीएसएसएससी की सुस्त चाल से टूट रहे नौजवानों के सपने, वेटिंग लिस्ट की मांग को लेकर सीएम को लिखी चिट्ठी
यूपीएसएसएससी की सुस्त चाल से टूट रहे नौजवानों के सपने, वेटिंग लिस्ट की मांग को लेकर सीएम को लिखी चिट्ठी
साल-दर-साल लटकती हैं भर्तियां, टॉपर दूसरी नौकरियों में चले जाते हैं और खाली रह जाते हैं पद
0.25 नंबर से चूके योग्य युवा बेरोजगार, 35 लाख प्रतियोगी छात्रों के नाम पर सीएम से गुहार
लखनऊ। सरकारी नौकरी की आस में दिन-रात एक करने वाले उत्तर प्रदेश के नौजवानों का सब्र अब जवाब देने लगा है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) की धीमी रफ्तार और प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) जारी न करने की व्यवस्था से योग्य अभ्यर्थी हताश हैं। अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए "समस्त यूपीएसएसएससी प्रतियोगी छात्र" के बैनर तले छात्रों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर इंसाफ की गुहार लगाई है।
छात्रों ने चिट्ठी में अपना दर्द बयां करते हुए लिखा है कि आयोग की किसी भी भर्ती को पूरा होने में कई-कई साल लग जाते हैं। इस लंबे वक्त में कई होनहार अभ्यर्थी एसएससी, रेलवे, पुलिस या दूसरे राज्य स्तरीय इम्तिहानों में चुनकर वहां नौकरी शुरू कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि यूपीएसएसएससी की परीक्षा पास करने के बाद भी वे पद नहीं संभालते और हजारों पद खाली रह जाते हैं।
सबसे ज्यादा टीस उन अभ्यर्थियों को है, जो कटऑफ से महज 0.25 या 0.50 जैसे मामूली अंकों से पीछे रह जाते हैं। वेटिंग लिस्ट का नियम न होने से खाली बचे पदों पर उसी भर्ती के दूसरे योग्य उम्मीदवारों को मौका नहीं मिलता। एक तरफ सरकारी महकमों में कुर्सियां खाली पड़ी रहती हैं, तो दूसरी तरफ जरा से नंबर से चूके काबिल नौजवान बेरोजगारी झेलने को मजबूर हैं।
छात्रों ने मुख्यमंत्री से इस मसले पर फौरन ध्यान देने की मांग की है। उनका कहना है कि आयोग को सख्त हिदायत दी जाए, ताकि मौजूदा और आगे की सभी भर्तियों में वेटिंग लिस्ट जरूर लागू हो। युवाओं का दावा है कि सरकार ऐसा करती है तो खाली रह जाने वाले पदों पर योग्य नौजवानों को तुरंत रोजगार मिलेगा और सूबे के करीब 35 लाख प्रतियोगी छात्रों को सीधा फायदा होगा। अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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