10 साल की उम्र में कौन बना शतरंज का ग्रैंडमास्टर

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10 साल की उम्र में कौन बना शतरंज का ग्रैंडमास्टर
शतरंज के खिलाड़ी प्रग्गनानंदा के बारे में जानिए।
10 अगस्त 2005 को चेन्नई में जन्मे प्रग्गनानंदा सिर्फ 3 साल की उम्र में ही इस खेल से जुड़ गए थे I उनके पिता रमेश बाबू पोलियो से ग्रसित है और बैंक में काम करते हैं Iप्रगनानंदा ने बड़ी बहन वैशाली को देखकर शतरंज खेलना शुरू किया था।
वैशाली खुद महिला ग्रैंडमास्टर हैं। प्रगनानंदा साल 2018 में सिर्फ 12 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बन गए थे।
उन्होंने विश्वनाथन का रिकॉर्ड तोड़ा था, जो 18 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बने थे।साल 2016 में प्रागननंदा सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय मास्टर बने थे। उन्होंने ये उपलब्धि 10 साल की उम्र में हासिल कर ली थी।
प्रगनानंद ने साल 2013 में विश्व युवा शतरंज चैंपियनशिप अंडर-8 का खिताब जीता था।इसके बाद उन्होंने 2015 में अंडर-10 चैंपियनशिप का खिताब भी जीता।
प्रागननंदा 21 साल बाद शतरंज विश्व कप के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बने हैं। विश्वानथन ने साल 2000 और 2002 में विश्व कप का खिताब जीता था।गौरवशाली पल: भारत के 17 वर्षीय रमेश बाबू प्रग्गनानंदा ने 5 बार के चैस विश्व विजेता रहे मैग्नस कार्लसन को हराया ।
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