हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से कारीगर की दर्दनाक मौत, मुआवजे के लिए जोरदार प्रदर्शन

हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से कारीगर की दर्दनाक मौत, मुआवजे के लिए जोरदार प्रदर्शन

हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से कारीगर की दर्दनाक मौत, मुआवजे के लिए जोरदार प्रदर्शन

गृह प्रवेश की खुशियों के बीच छाया मातम, हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से बुझ गया घर का चिराग।

परिजनों और किसान यूनियन ने सड़क पर लगाया जाम, मुआवजे और कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन।

दुबग्गा लखनऊ। लखनऊ के दुबग्गा स्थित इज्जतनगर कॉलोनी में शुक्रवार को उस समय मातम पसर गया, जब एक नए मकान में गृह प्रवेश की तैयारियों के दौरान बड़ा हादसा हो गया। मकान के छज्जे पर सजावट के लिए झालर लगा रहे 24 वर्षीय इलेक्ट्रॉनिक कारीगर सुहैल की 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मृतक सुहैल मूल रूप से हरदोई के संडीला क्षेत्र का निवासी था और यहां मजदूरी करने आया था।

​मिली जानकारी के अनुसार, मकान मालिक सारिब अब्बास के नए घर में शनिवार को गृह प्रवेश का कार्यक्रम तय था। इसी उपलक्ष्य में घर को सजाने का काम चल रहा था। सुहैल जब छज्जे पर झालर लगा रहा था, तभी वह पास से गुजर रही हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गया और करंट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मकान का छज्जा सड़क की तरफ काफी बाहर निकालकर बनाया गया था, जिसकी वजह से वह पहले से मौजूद हाईटेंशन लाइन के बेहद करीब आ गया था।

​इस घटना के बाद मृतक के परिजनों और भारतीय किसान यूनियन (हिंदुस्तान) के कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने बिजली विभाग और मकान मालिक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हरदोई रोड पर जाम लगा दिया और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, दोषी मकान मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और क्षेत्र से हाईटेंशन लाइन को तुरंत हटाया जाए।

​जाम की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल और बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिए जाने के बाद करीब आधे घंटे से चल रहा प्रदर्शन समाप्त हुआ। पुलिस ने सुहैल के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पुलिस इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसके स्तर पर हुई।

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